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सूचना का अधिकार अधिनियम क्या है?
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 संसद द्वारा पारित किया गया है और इसे 15 जून, 2005 को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई है। इस अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को सूचना के अधिकार का एक व्यावहारिक तंत्र उपलब्ध कराना है, ताकि वे सार्वजनिक प्राधिकरणों के नियंत्रण में मौजूद सूचना तक पहुँच प्राप्त कर सकें; ऐसा करने का लक्ष्य प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना है।
सूचना के अधिकार का क्या अर्थ है?
इसमें निम्नलिखित अधिकार शामिल हैं -
- कार्य, दस्तावेज़ और अभिलेखों का निरीक्षण करें।
- दस्तावेज़ों या अभिलेखों के नोट्स, उद्धरण या प्रमाणित प्रतियां लें।
- सामग्री के प्रमाणित नमूने लें।
- जानकारी प्रिंटआउट, डिस्केट, फ्लॉपी, टेप, वीडियो कैसेट या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के रूप में, अथवा प्रिंटआउट के ज़रिए प्राप्त करें।
पारदर्शिता ऑडिट के लिए एक ढाँचा
RTI अधिनियम की धारा 4, सार्वजनिक प्राधिकरणों के कामकाज में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है। जहां धारा 4(1)(a) रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए एक सामान्य दिशानिर्देश प्रदान करती है, ताकि जानकारी को आसानी से संग्रहीत और सुरक्षित रखा जा सके, वहीं धारा 4 की उप-धाराएं b, c और d संगठनात्मक उद्देश्यों और कार्यों से संबंधित हैं। RTI अधिनियम की धारा 4 की उप-धाराओं (b), (c) और (d) तथा अन्य संबंधित जानकारी को छह श्रेणियों के अंतर्गत समूहीकृत किया जा सकता है; जो इस प्रकार हैं: 1- संगठन और कार्य, 2- बजट और कार्यक्रम, 3- प्रचार और जन-संपर्क, 4- ई-गवर्नेंस, 5- निर्धारित जानकारी, और 6- अपनी पहल पर प्रकट की गई जानकारी।
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